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विश्वकर्मा जी की आरती लिरिक्स

Ashu

विश्वकर्मा जी की आरती लिरिक्स: निर्माण के देवता की स्तुति का दिव्य अवसर

विश्वकर्मा जी को सृजन, निर्माण और तकनीकी कौशल के देवता के रूप में पूजा जाता है। वे देवताओं के शिल्पकार माने जाते हैं, जिन्होंने स्वर्ग, पुष्पक विमान, द्वारका नगरी, और भगवान शंकर का त्रिशूल तक बनाया। ‘विश्वकर्मा जयंती’ या ‘विश्वकर्मा पूजा’ के अवसर पर इनकी आरती करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस लेख में हम “विश्वकर्मा जी की आरती लिरिक्स”, उसकी विधि और लाभ की जानकारी साझा कर रहे हैं।

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भगवान विश्वकर्मा की आरती


ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ,
सकल सृष्टि के कर्ता, रक्षक स्तुति धर्मा ।। 1 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
.
आदि सृष्टि में विधि को, श्रुति उपदेश दिया,
जीव मात्र का जग में, ज्ञान विकास किया।। 2।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
.
ऋषि अंगिरा ने तप से, शांति नहीं पाई,
ध्यान किया जब प्रभु का, सकल सिद्ध आई ।। 3 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
.
रोग ग्रस्त राजा ने जब आश्रय लीना ,
संकट मोचन बन कर दूर दुःख कीना ।। 4 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
.
जब रथकार दम्पति, तुम्हारी टेर करी,
सुनकर दीन प्रार्थना, विपत्ति हरी सगरी ।। 5 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
.
एकानन चतुरानन, पंचानन राजे ,
द्विभुज, चतुर्भुज, दसभुज, सकल रूप साजे ।। 6 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
.
ध्यान धरे जब पद का, सकल सिद्धि आवे,
मन दुविधा मिट जाये, अटल शांति पावे ।। 7 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
.
श्री विश्वकर्मा जी की आरती जो कोई जन गावे ,
कहत गजानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावे ।। 8 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।

विश्वकर्मा जी की आरती न केवल श्रद्धा की अभिव्यक्ति है, बल्कि यह रचनात्मकता और प्रगति का प्रतीक भी है। जो भी श्रद्धाभाव से इस आरती को करता है, उसे अपने जीवन, कार्यक्षेत्र और व्यवसाय में सफलता मिलती है। यदि आप भी अपने कार्य में उन्नति और मानसिक संतुलन की कामना करते हैं, तो नित्य विश्वकर्मा जी की आरती करें और उनसे दिव्य प्रेरणा प्राप्त करें।

विश्वकर्मा जी की आरती विधि

  • प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • पूजा स्थान को साफ कर वहां विश्वकर्मा जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
  • मूर्ति को पुष्प, चंदन, अक्षत और जल अर्पित करें।
  • दीपक जलाकर धूप व अगरबत्ती करें।
  • सादर आरती गाएं और घंटी बजाएं।
  • प्रसाद में मिठाई या पंचमेवा अर्पित करें।
  • अंत में सभी परिजनों के साथ आरती करें।

विश्वकर्मा जी की आरती के लाभ

  • कार्यस्थल की शांति और समृद्धि में वृद्धि होती है।
  • औद्योगिक और तकनीकी क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है।
  • मशीनरी या यंत्रों की बाधाएं दूर होती हैं।
  • नई सोच और रचनात्मक ऊर्जा का विकास होता है।
  • घर-परिवार में मंगल और संतुलन बना रहता है।
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