जल निगम की ओर से सीवर और पेयजल व्यवस्था सुधारने के लिए तैयार की गई 18 पुराने वार्डों की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) बीते तीन महीनों से शासन की मंजूरी का इंतजार कर रही है। स्वीकृति न मिलने के कारण किसी भी वार्ड में काम शुरू नहीं हो सका है, जिससे स्थानीय लोगों की समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं।

जल निगम ने नगर निगम और जलकल से जुड़े सीवर तथा पेयजल कार्यों के लिए डीपीआर बनाकर शासन को भेजी है। इन योजनाओं के तहत 18 पुराने वार्डों में पुरानी सीवर और पानी की पाइप लाइनों को बदला जाना है। करीब 823 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित इस परियोजना में ट्रेंचलेस तकनीक अपनाने की योजना है, जिससे सड़कों की खुदाई कम होगी। यह योजना आगामी 40 वर्षों की आबादी और जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।
इन वार्डों में गंगा किनारे के इलाके भी शामिल हैं, जहां सीवर और जलापूर्ति की स्थिति लंबे समय से खराब बनी हुई है। इसके अलावा रामनगर क्षेत्र में 94.44 करोड़ रुपये की लागत से 93 किलोमीटर लंबी नई पेयजल पाइप लाइन बिछाने का प्रस्ताव है। वहीं सूजाबाद डोमरी वार्ड में 36.45 करोड़ रुपये की लागत से विकास कार्य किए जाने हैं।

इसके साथ ही जल निगम ने वॉटर टैंक और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से जुड़ी डीपीआर भी शासन को भेजी है, लेकिन इन परियोजनाओं पर भी अब तक काम शुरू नहीं हो सका है।
जलकल विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सभी डीपीआर तैयार कर शासन को भेज दी गई हैं और उम्मीद है कि इसी महीने मंजूरी मिल जाएगी। इस संबंध में दोबारा शासन को पत्र भेजा जा रहा है।
मंजूरी में लगातार हो रही देरी के चलते नागरिकों को पानी की किल्लत, सीवर जाम और गंदगी जैसी समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द काम शुरू नहीं हुआ तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
