उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायत प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो रहा है। ऐसे में पंचायत चुनाव को लेकर स्थिति अभी साफ नहीं है। मतदाता सूची जारी होने के बाद महज एक महीने के भीतर चुनावी तैयारियां पूरी करना आसान नहीं माना जा रहा। प्रशासनिक स्तर पर अभी कई जरूरी प्रक्रियाएं लंबित हैं, जिससे समय पर चुनाव कराना चुनौतीपूर्ण दिख रहा है।

सबसे अहम मुद्दा अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण से जुड़ा है। इसके लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन की प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं हो सकी है। आयोग में पांच सदस्यों की नियुक्ति की जानी है, जिनमें अध्यक्ष के रूप में उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश को शामिल किया जाएगा। इसके बाद आयोग को ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
इन औपचारिकताओं में समय लगना तय है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि कार्यकाल समाप्त होने तक चुनाव न हो पाने की स्थिति में पंचायतों में प्रशासक नियुक्त किए जा सकते हैं। नियमानुसार छह महीने के भीतर चुनाव कराना आवश्यक होगा। फिलहाल मई तक चुनाव संपन्न कराना संभव नहीं दिख रहा है।