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सरकारी धन से अवैध निर्माण का आरोप, मंदिर का रास्ता और नाली बंद; बुजुर्ग दंपती पर हमले से गांव में तनाव

जौनपुर/आजमगढ़। जौनपुर जनपद की शाहगंज तहसील के विकास खंड सुईथा कला अंतर्गत ग्राम सभा बांसगांव से प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि ग्राम प्रधान और ब्लॉक स्तर के कुछ अधिकारियों की कथित मिलीभगत से सरकारी धन का उपयोग निजी लाभ के लिए करते हुए अवैध निर्माण कराया गया। इस निर्माण के चलते वर्षों से उपयोग में आ रहा सार्वजनिक रास्ता, मंदिर तक जाने का मार्ग और जल निकासी की नाली बंद हो गई, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।

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ग्रामीणों का आरोप: निजी दरवाजे के सौंदर्यीकरण में लगा सरकारी पैसा

ग्राम निवासी संजय मिश्र और गौरी शंकर मिश्रा ने आरोप लगाया है कि उनके पड़ोस में रहने वाले महेंद्र मिश्रा और प्रवीण मिश्रा ने ग्राम प्रधान व ब्लॉक अधिकारियों की कथित कृपा से सरकारी निधि का इस्तेमाल अपने निजी दरवाजे के सौंदर्यीकरण के लिए कराया।

आरोप है कि इस निर्माण के दौरान पीड़ितों के घर के पास स्थित जमीन पर जबरन कब्जा करते हुए वर्षों से चल रही नाली के चैंबर को बंद कर दिया गया। साथ ही गांव के प्राचीन मंदिर और कई घरों तक जाने वाला पारंपरिक रास्ता भी अवरुद्ध कर दिया गया।

सार्वजनिक रास्ते पर पशुशाला बनाने का भी आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि महेंद्र मिश्रा ने सार्वजनिक मार्ग पर ही पशुशाला बनाकर अतिक्रमण कर लिया है, जिससे लोगों का आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है। उनका दावा है कि जिस रास्ते से पीढ़ियों से ग्रामीण आते-जाते रहे हैं, उसे दबंगई के बल पर बंद कर दिया गया।

बीडीओ के दबाव का आरोप

पीड़ितों के अनुसार जब इस मामले की शिकायत ग्राम प्रधान से की गई तो उन्होंने कथित रूप से कहा कि महेंद्र मिश्रा के दामाद पीयूष त्रिपाठी, जो शाहगंज तहसील में बीडीओ पद पर तैनात बताए जा रहे हैं, के दबाव के कारण वह कोई कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं। पीड़ित पक्ष का दावा है कि इस संबंध में मोबाइल वार्ता के साक्ष्य भी उनके पास मौजूद हैं।

सुबह-सुबह कराया गया निर्माण

पीड़ितों का आरोप है कि 4 जनवरी 2025 को बिना किसी पूर्व सूचना के सुबह करीब छह बजे आनन-फानन में निर्माण कार्य कराया गया। इस संबंध में पीड़ित परिवार ने अधिकारियों को प्रार्थना पत्र देकर शिकायत की थी। बताया जाता है कि प्रारंभिक दो जांचों में ब्लॉक और राजस्व विभाग की रिपोर्ट पीड़ित पक्ष के पक्ष में पाई गई थी।

तीसरी जांच में बदली रिपोर्ट, फिर हुआ निर्माण

मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब 19 फरवरी 2026 को बीडीओ द्वारा तीसरी जांच में कथित रूप से विपरीत रिपोर्ट पेश कर दी गई। पीड़ितों का आरोप है कि इसी कथित संरक्षण के चलते 22 फरवरी 2026 को रविवार की शाम चार बजे से रात आठ बजे तक अवैध निर्माण को अंतिम रूप दे दिया गया।

एक ही मामले में दो अलग-अलग जांच रिपोर्ट सामने आने से प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं और उच्च स्तरीय जांच की मांग तेज हो गई है।

निरीक्षण के बाद हुआ हमला

पीड़ित परिवार ने 7 मार्च 2026 को फिर से अधिकारियों को शिकायत भेजी। इसके बाद 8 मार्च को उपजिलाधिकारी ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया। आरोप है कि इससे नाराज होकर 10 मार्च 2026 को महेंद्र मिश्रा, प्रवीण मिश्रा, श्रीकेश मिश्रा और रीता मिश्रा ने घर में घुसकर 70 वर्षीय गौरी शंकर मिश्रा और उनकी 65 वर्षीय पत्नी मीरा मिश्रा पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया।

इस घटना से गांव में दहशत का माहौल बन गया और पीड़ित परिवार को पुलिस की शरण लेनी पड़ी।

पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा

मामले का संज्ञान लेते हुए थाना सरपतहा पुलिस ने दोनों पक्षों को थाने बुलाकर जांच की। इसके बाद 11 मार्च 2026 को भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 115(2), 352, 351(3), 324(4) और 333 के तहत महेंद्र मिश्रा, श्रीकेश मिश्रा, प्रवीण मिश्रा और रीता मिश्रा के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।

उच्च स्तरीय जांच की मांग

पीड़ित परिवार ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही सरकारी धन के दुरुपयोग की जांच, मंदिर और ग्रामीणों के लिए बंद किए गए रास्ते व नाली को तुरंत खुलवाने की कार्रवाई की जाए।

उन्होंने यह भी मांग की है कि इस विवादित निर्माण में शामिल सभी दोषियों, चाहे वे जनप्रतिनिधि हों या अधिकारी, के खिलाफ कड़ी कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में सरकारी तंत्र का दुरुपयोग कर सार्वजनिक अधिकारों का हनन न हो सके।

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