ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती एक बार फिर विवादों में आ गए हैं। इस बार उन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने आरोप लगाया है कि शंकराचार्य शिविर और गुरुकुल की आड़ में नाबालिग बच्चों के यौन शोषण, बाल उत्पीड़न और अन्य अवैध गतिविधियों में शामिल रहे हैं। यह मामला अब प्रयागराज की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट तक पहुंच गया है, जिससे विवाद और बढ़ गया है।

इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि यह उनके विरोधियों की सोची-समझी साजिश है और उन्हें बदनाम करने के लिए ऐसे आरोप लगाए जा रहे हैं। उनका कहना है कि वे हमेशा शास्त्र आधारित मुद्दों पर सवाल उठाते रहे हैं और जब विरोधी उन्हें वैचारिक रूप से घेर नहीं सके तो अब व्यक्तिगत आरोपों का सहारा लिया जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके खिलाफ एक संगठित समूह सक्रिय है और इसमें उत्तर प्रदेश सरकार की भूमिका भी नजर आती है। उनके अनुसार गौ रक्षा जैसे मुद्दों पर उनके मुखर रुख के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि यह विवाद पहले से चल रही तनातनी से जुड़ा है। हाल ही में जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने उन्हें फर्जी शंकराचार्य बताया था। वहीं माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या स्नान को लेकर हुए घटनाक्रम और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद भी विवाद बढ़ा था।
कोर्ट की कार्यवाही के अनुसार, शिकायतकर्ता ने 8 फरवरी को शिकायत दाखिल की और दो नाबालिग पीड़ित पेश करने का दावा किया। 10 फरवरी को शंकराचार्य पक्ष ने कोर्ट में लिखित जवाब देकर आरोपों को झूठा बताया और पॉक्सो एक्ट की धारा 22 का हवाला दिया। अब इस मामले की अगली सुनवाई 20 फरवरी को होगी, जहां अदालत तय करेगी कि एफआईआर दर्ज होगी या शिकायत खारिज की जाएगी।