
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वाराणसी दौरे के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अपनाए गए कदमों ने विपक्षी दलों में आक्रोश फैला दिया है। कांग्रेस नेताओं को देर रात उनके घरों में नजरबंद कर दिए जाने की कार्रवाई को विपक्ष ने लोकतंत्र पर सीधा हमला करार दिया है।

जनपद चंदौली के वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ. नारायण मूर्ति ओझा ने कहा कि यह सरकार विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए अलोकतांत्रिक तरीके अपना रही है। देर रात पुलिस द्वारा घरों पर धावा बोलकर परिवार के सदस्यों को प्रताड़ित करना बेहद निंदनीय है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति अंग्रेजों की हुकूमत से भी बदतर है और लोकतंत्र व संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है।
किसान कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष प्रदीप मिश्रा ने भी सरकार की इस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की। उन्होंने बताया कि रात 11 बजे दर्जनों की संख्या में पुलिसकर्मी उनके घर पर पहुंचे और प्रताड़ित करने का प्रयास किया। यह सरकार की ओछी मानसिकता और तानाशाही रवैये को दर्शाता है। मिश्रा ने कहा कि पूरे प्रदेश में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को नजरबंद कर उनके घरों से बाहर निकलने तक नहीं दिया गया।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भाजपा सरकार इस तरह के कदम उठाकर अपने ‘वोट चोरी’ जैसे कुकृत्यों को छिपाने का प्रयास कर रही है। लेकिन कांग्रेस कार्यकर्ता अब पीछे हटने वाले नहीं हैं। उनका कहना है कि जननायक राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी के सशक्त नेतृत्व में कार्यकर्ता जनता के साथ मिलकर इस सरकार को उखाड़ फेंकेंगे।
कांग्रेस नेताओं ने साफ कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की आवाज को दबाना तानाशाही की ओर बढ़ना है। अघोषित आपातकाल जैसे हालात जनता बर्दाश्त नहीं करेगी और 2024 का चुनाव इसका स्पष्ट जवाब देगा।