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Gayatri Mantra Ka Arth | गायत्री मंत्र का अर्थ

गायत्री मंत्र, जिसे “वेदों की माता” कहा जाता है, हमारे सनातन धर्म का सबसे पवित्र और शक्तिशाली मंत्र है। यह मंत्र न केवल हमारी आत्मा को शुद्ध करता है बल्कि हमें ज्ञान, शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। इसका सही अर्थ और महत्व समझने से हमारी आध्यात्मिक यात्रा और भी सरल और प्रभावशाली हो जाती है। आइए, इस मंत्र के गहरे अर्थ को जानें और समझें कि यह कैसे हमारे जीवन को सार्थक बना सकता है।

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गायत्री मंत्र का अर्थ

गायत्री मंत्र – ‘ॐ भूर्भव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य,

धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।

‘ इस महामंत्र का अर्थ- ‘उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक,

सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक,

देवस्वरूप परमात्मा को हम ,

अन्तःकरण में धारण करें।

वह परमात्मा हमारी बुद्धि को,

सन्मार्ग में प्रेरित करे।

गायत्री मंत्र सिर्फ एक प्रार्थना नहीं है, यह हमारे जीवन का मार्गदर्शन है। इसके हर शब्द में छिपा अर्थ हमें सत्य, धर्म और ज्ञान के पथ पर चलने की प्रेरणा देता है। यदि हम इसके अर्थ को अपने जीवन में आत्मसात करें, तो हमारा मन शांत, आत्मा संतुष्ट और जीवन सफल हो सकता है। इसे केवल उच्चारित न करें, इसे महसूस करें, और इसके माध्यम से अपने जीवन को नई दिशा दें।

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