
रामायण की कथा में शबरी भक्ति का अनुपम उदाहरण हैं। उनकी वर्षों की तपस्या और प्रभु भक्ति ने उन्हें वह अद्भुत क्षण दिया जब श्रीराम स्वयं उनके आश्रम पधारे। इसीलिए भक्तजन गाते हैं — देखो शबरी के खुल गए भाग, क्योंकि यह घटना साधना और विश्वास की चरम परिणति है।
Dekho Sabri Ke Khul Gye Bhag
देखो शबरी के खुल गए भाग कुटिया में राम आ गए
मेरी कुटिया में गंगा और सरयू
स्नान करेंगे श्री राम कुटिया में राम आ गए
देखो शबरी के खुल गए भाग कुटिया में राम आ गए
मेरी कुटिया में चंदन का पेड़ है
तिलक लगाऊ सुबह शाम कुटिया में राम आ गए
देखो शबरी के खुल गए भाग कुटिया में राम आ गए
मेरी कुटिया में तुलसी का पेड़ है
पूजा करेंगे सुबह शाम कुटिया में राम आ गए
देखो शबरी के खुल गए भाग कुटिया में राम आ गए
भर भर डलिया बैरों के लाई
देखो भोग लगाएं मेरे राम कुटिया में राम आ गए
देखो शबरी के खुल गए भाग कुटिया में राम आ गए
जो बेर शबरी ने राम को दिए हैं
देखो राम जी ने खाई झुठे बेर जी
देखो शबरी के खुल गए भाग कुटिया में राम आ गए
जो बेर शबरी ने लक्ष्मण को दिए हैं
लक्ष्मण ने फेंके नीचे बेर कुटिया में राम आ गए
देखो शबरी के खुल गए भाग कुटिया में राम आ गए
लक्ष्मण को जब शक्ति लगी थी
संजीवन बन गए बेर कुटिया में राम आ गए
देखो शबरी के खुल गए भाग कुटिया में राम आ गए
जब भक्त देखो शबरी के खुल गए भाग का स्मरण करते हैं, तो यह हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति और प्रतीक्षा कभी व्यर्थ नहीं जाती। जैसे शबरी को राम का साक्षात्कार हुआ, वैसे ही धैर्य, विश्वास और प्रेम से प्रभु हर भक्त की पुकार अवश्य सुनते हैं। यही भाव रामायण और भक्ति का शाश्वत संदेश है।

