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काशी की राजनीति के ‘संत’ कहे जाने वाले और वाराणसी दक्षिणी से सात बार विधायक रहे स्वर्गीय श्याम देव राय चौधरी ‘दादा’ को शहर ने एक भावभीनी श्रद्धांजलि दी है। जी हाँ, वाराणसी के कोदई की चौकी मार्ग पर अब दादा की याद हमेशा ताज़ा रहेगी। उनके सम्मान में यहाँ एक भव्य ‘स्मृति द्वार’ का निर्माण किया गया है, जो न केवल एक द्वार है, बल्कि काशी के लाडले नेता की सादगी और सेवा का प्रतीक भी है। कोदई की चौकी… काशी का वह व्यस्त इलाका, जहाँ की गलियों से स्वर्गीय श्याम देव राय चौधरी ‘दादा’ का गहरा नाता रहा। आज यही मार्ग उनके नाम से सुशोभित हो गया है।
वाराणसी नगर निगम और स्थानीय प्रशासन की पहल पर कोदई की चौकी मार्ग पर बने इस ‘दादा स्मृति द्वार’ का लोकार्पण किया गया। इस द्वार पर दादा की एक सौम्य छवि उकेरी गई है, जो आने-जाने वाले हर काशीवासी को उनकी सादगी की याद दिलाएगी। आपको बता दें कि श्याम देव राय चौधरी, जिन्हें लोग प्यार से ‘दादा’ बुलाते थे, का पिछले वर्ष नवंबर (2024) में निधन हो गया था। वे 1989 से 2017 तक लगातार सात बार वाराणसी दक्षिणी विधानसभा से विधायक रहे। मंत्री पद पर रहने के बावजूद वे हमेशा सुरक्षा तामझाम से दूर, अपनी स्कूटी या पैदल ही जनता के बीच निकल पड़ते थे। कोदई की चौकी मार्ग का चयन इसलिए भी खास है क्योंकि यह उनके विधानसभा क्षेत्र का एक प्रमुख हिस्सा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह द्वार उन्हें हमेशा यह एहसास दिलाएगा कि उनके ‘दादा’ आज भी उनके बीच ही मौजूद हैं।
“दादा केवल एक नेता नहीं थे, वे हमारे परिवार के मुखिया जैसे थे। कोदई की चौकी से उनका रोज़ का आना-जाना था। आज जब इस द्वार का नाम उनके नाम पर रखा गया है, तो ऐसा लग रहा है कि उनकी सेवा और समर्पण को एक सच्ची श्रद्धांजलि मिली है। यह आने वाली पीढ़ियों को बताएगा कि काशी में एक ऐसे विधायक भी थे जिन्होंने सादगी की मिसाल पेश की।”
सात बार विधायक, पूर्व मंत्री, लेकिन जीवन ऐसा कि कोई भी आसानी से गले लगा ले। श्याम देव राय चौधरी ‘दादा’ का यह स्मृति द्वार महज ढांचा नहीं है, बल्कि यह प्रतीक है उस भरोसे का जो काशी की जनता ने दशकों तक उन पर जताया। कोदई की चौकी से गुजरने वाला हर राहगीर अब न केवल इस रास्ते से गुजरेगा, बल्कि एक जन-नायक की यादों से भी रूबरू होगा।
