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भावुक कर देने वाला पल: मोतियाबिंद से जूझ रही युवती की मदद कर भावुक हुए डीएम उमेश मिश्रा

उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर में एक आम जनसुनवाई उस वक्त असाधारण बन गई जब एक युवती की व्यथा सुनकर ज़िलाधिकारी उमेश मिश्रा भावुक हो उठे। यह दृश्य न सिर्फ प्रशासनिक संवेदनशीलता का प्रतीक बना, बल्कि इंसानियत की मिसाल भी पेश कर गया। ज़िला मुख्यालय के कलेक्ट्रेट सभागार में जनसुनवाई के दौरान जब खुशी नामक युवती अपनी आंखों की बीमारी और आर्थिक असमर्थता की बात करते हुए बिलख-बिलख कर रोने लगी, तो पूरा माहौल एक पल को स्तब्ध हो गया।

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खुशी ने बताया कि उसे आंखों में मोतियाबिंद हो गया है, जिससे उसे दिखना तक मुश्किल हो गया है। वह कई दिनों से इलाज के लिए प्रयास कर रही थी, लेकिन उसके पिता आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। रिश्तेदारों से भी उसे कोई मदद नहीं मिली। उसने भावुक होकर कहा कि अब उसे कुछ सूझ नहीं रहा और कोई भी उसकी मदद को तैयार नहीं है। यह सुनते ही डीएम उमेश मिश्रा की आंखें नम हो गईं और वे अपने आंसू रोक नहीं पाए। उन्होंने त्वरित निर्णय लेते हुए मुख्य चिकित्साधिकारी को फोन लगाया और कहा कि इस बच्ची का इलाज प्राथमिकता पर किया जाए।

डीएम ने अपने स्टॉफ को निर्देश दिया कि खुशी को तत्काल अपनी सरकारी गाड़ी से जिला अस्पताल ले जाया जाए और डॉक्टर से खुद उनकी बात कराई जाए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, “बेटा, चिंता मत करो। आज के समय में सारी सुविधाएं मौजूद हैं। तुम सिर्फ इलाज करवाओ, बाकी सब मैं देख लूंगा। तुम्हारी आंखें ठीक हो जाएंगी।”

इस भरोसे और संवेदनशीलता को पाकर खुशी के चेहरे पर उम्मीद की किरणें लौट आईं। वह एक बार फिर रो पड़ी, लेकिन इस बार उसकी आंखों में राहत और आभार के आँसू थे। खुशी ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “भगवान डीएम साहब को खुश रखे, उन्होंने मेरे लिए वो किया जो मेरे अपने भी नहीं कर सके। ऐसा लगा जैसे भगवान ने ही मेरी सुन ली हो। मेरी तरफ से उन्हें ढेरों दुआएं।”

यह पूरा घटनाक्रम दर्शाता है कि प्रशासनिक पद पर बैठा व्यक्ति जब संवेदनशीलता और करुणा से काम करता है, तो उसका असर सिर्फ व्यवस्था पर नहीं, बल्कि इंसानी जिंदगियों पर भी होता है। डीएम उमेश मिश्रा का यह कदम न केवल खुशी के लिए जीवन बदलने वाला सिद्ध हो सकता है, बल्कि समाज के लिए एक प्रेरणा है कि जिम्मेदारी निभाने के साथ-साथ यदि संवेदना भी जुड़ी हो, तो व्यवस्था जनकल्याण का असली रूप ले सकती है।

जनसुनवाई में उपस्थित अन्य लोगों ने भी इस घटना को देखकर सराहना की और कहा कि ऐसे अधिकारी ही जनता के दिल में जगह बनाते हैं। खुशी अब अपनी आंखों के इलाज को लेकर आश्वस्त है और उसे उम्मीद है कि जल्द ही वह बिना किसी तकलीफ के देख पाएगी। डीएम उमेश मिश्रा का यह निर्णय यह बताने के लिए काफी है कि जब एक प्रशासक दिल से काम करता है, तो वह किसी की ज़िंदगी को रोशनी से भर सकता है।

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