वाराणसी। अवैध कफ सिरप के धंधे में लंबे समय से सक्रिय शुभम जायसवाल अब कानून के शिकंजे में फंस गया है। गाजियाबाद में उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद गिरफ्तारी की तैयारी शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि उसके पकड़े जाने पर उन लोगों के नाम भी सामने आएंगे जो इस नेटवर्क को संरक्षण देते थे। चर्चा है कि इस धंधे में कुछ सफेदपोश और पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।

सवाल यह भी है कि वाराणसी में कफ सिरप की लगातार बरामदगी के बावजूद स्थानीय पुलिस ने शुभम तक पहुंचने में इतनी देर क्यों कर दी। शहर में यह अवैध कारोबार काफी समय से चल रहा था।
कोडिन से तैयार होता है नशीला सिरप
कफ सिरप में कोडिन नामक रसायन मिलाने पर वह नशीला बन जाता है। यह पदार्थ प्रतिबंधित है और इसकी अवैध बिक्री पर एनडीपीएस कानून के तहत कड़ी सजा का प्रावधान है। शराबबंदी के बाद बिहार में इसे नशे के सस्ते विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जाने लगा।
निर्माण से सप्लाई तक पूरा नेटवर्क
जांच में सामने आया है कि शुभम जायसवाल, सहारनपुर निवासी अभिषेक वर्मा के साथ मिलकर हिमाचल प्रदेश में प्रतिबंधित सिरप बनवाता था। इसके बाद गाजियाबाद और अन्य शहरों में गोदामों में स्टॉक रखा जाता था। फिर इन्हें चावल, गेहूं और चिप्स की बोरियों में छिपाकर बिहार और पूर्वोत्तर राज्यों में सप्लाई किया जाता था। गाजियाबाद पुलिस ने गोदाम को सील कर दिया है और लगभग डेढ़ दर्जन लोगों पर मुकदमा दर्ज किया है, जिनमें शुभम भी शामिल है।