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अस्सी घाट से हरिश्चंद्र घाट तक निकाली गई अस्थि कलश यात्रा

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वाराणसी। मिर्जापुर से बड़ी संख्या में लोग अस्थि कलश लेकर सोमवार को वाराणसी के प्रसिद्ध अस्सी घाट पहुंचे। यहां वैदिक ब्राह्मणों द्वारा पूरे विधि-विधान के साथ मंत्रोच्चारण करते हुए पूजा-अर्चना संपन्न कराई गई। इसके बाद श्रद्धालु अस्सी घाट से हरिश्चंद्र घाट के लिए रवाना हुए, जहां पहुंचकर अस्थि कलश का गंगा में विसर्जन किया गया।
घाट पर मौजूद लोगों ने भावपूर्ण वातावरण में श्रद्धांजलि अर्पित की। इस कार्यक्रम में राष्ट्रवादी युवक कांग्रेस के कार्यकर्ता, एनसीपी पदाधिकारी और स्थानीय लोग भी बड़ी संख्या में शामिल रहे। वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार कलश यात्रा के दौरान मंत्रोच्चारण, पुष्प अर्पण और गंगा आरती भी की गई।
श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए घाट पर सुरक्षा व्यवस्था भी तैनात रही।

बजड़े में सवार होकर हरिश्चंद्र घाट के लिए निकले श्रद्धालु

अस्थि कलश लेकर लोग मिर्जापुर से सड़क मार्ग के जरिए वाराणसी पहुंचे। अस्सी घाट पर पूजा के बाद सभी श्रद्धालु बजड़े में सवार होकर हरिश्चंद्र घाट के लिए रवाना हुए। वहां गंगा में अस्थि विसर्जन किया गया।

एनसीपी कार्यकर्ता अरुण दुबे ने साझा किया दर्द

मिर्जापुर निवासी अरुण दुबे ने बताया कि वह एनसीपी पार्टी के कार्यकर्ता हैं। उन्होंने कहा,
“आज अजित दादा पवार का दसवां है। हमें यूपी की जिम्मेदारी दी गई है। हम लोग मिर्जापुर से अस्थि कलश लेकर यहां पहुंचे हैं और शाम 5 बजे से पहले गंगा में विसर्जन करना है।”
उन्होंने बताया कि उनके साथ एनसीपी के अन्य पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी मौजूद हैं।
अरुण दुबे ने आगे कहा कि अस्थि कलश लेने के लिए वे पहले दिल्ली गए थे। वहां से कलश लेकर मिर्जापुर पहुंचे, जहां एक शोक सभा का आयोजन किया गया। इसके बाद सभी लोग बनारस आए हैं।

जल्द काशी दर्शन के लिए आएगा परिवार

अरुण दुबे ने बताया कि अस्थि विसर्जन के बाद अजित दादा पवार का परिवार भी एक दिन काशी में दर्शन-पूजन के लिए आएगा।
भावुक होते हुए उन्होंने कहा,
“इस घड़ी को शब्दों में बयां नहीं कर सकते। हम लोग एक परिवार थे। यह हमारे लिए बेहद दुखद क्षण है।”

अंतिम संस्कार परंपरा के अनुसार गंगा तट पर

श्रद्धालुओं का कहना है कि अंतिम संस्कार संस्कारों की परंपरा के अनुरूप गंगा तट पर किया जा रहा है, जिससे दिवंगत आत्मा को शांति प्राप्त हो। कार्यक्रम के समापन पर हरिश्चंद्र घाट पर गंगा में अस्थि विसर्जन किया गया।

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