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मकर संक्रांति पर काशी में उमड़ा आस्था का महासैलाब

मकर संक्रांति पर काशी में उमड़ा आस्था का महासैलाब, गंगा स्नान के साथ समाप्त होगा खरमास, 4 फरवरी से गूंजेंगी शहनाइयां
वाराणसी।
धर्मनगरी काशी में मकर संक्रांति के पावन पर्व पर श्रद्धा और आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। पर्व से एक दिन पूर्व ही अस्सी घाट, तुलसी घाट सहित सभी प्रमुख गंगा घाटों पर स्नानार्थियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। तड़के सुबह से ही लाखों श्रद्धालु महिला-पुरुष मां गंगा की पावन धारा में डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित करते नजर आए। घाटों पर “हर-हर गंगे” और “जय मां गंगा” के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।
मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान, दान-पुण्य करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। इसी आस्था के चलते काशी ही नहीं, बल्कि आसपास के जनपदों और अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु वाराणसी पहुंचे। स्नान के साथ-साथ घाटों पर अन्न, वस्त्र, तिल, गुड़ और गर्म कपड़ों का दान भी पूरे दिन चलता रहा।
काशी के विद्वानों और पंचांग के अनुसार इस वर्ष मकर संक्रांति का पुण्यकाल 14 जनवरी की रात्रि से प्रारंभ होगा, जबकि धार्मिक दृष्टि से पर्व का पूर्ण प्रभाव 15 जनवरी को माना जाएगा। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक संक्रांति काल 14 जनवरी की रात में लगेगा, वहीं ओड़िया मकर संक्रांति 15 जनवरी को दोपहर 3 बजे तक मान्य रहेगी। हालांकि अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार लोग वर्षों से 14 जनवरी को ही मकर संक्रांति मनाते आ रहे हैं, इसी कारण एक दिन पहले ही घाटों पर भारी भीड़ देखने को मिली।
सुरक्षा और स्वच्छता के पुख्ता इंतजाम
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। संवेदनशील घाटों पर पुलिस, पीएसी और जल पुलिस की तैनाती की गई। ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी के माध्यम से निगरानी रखी गई, जबकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए क्विक रिस्पांस टीम को भी अलर्ट पर रखा गया। नगर निगम की टीमें लगातार घाटों की साफ-सफाई में जुटी रहीं और कचरा प्रबंधन के लिए विशेष इंतजाम किए गए।
प्रशासन का अनुमान है कि 15 जनवरी को श्रद्धालुओं की संख्या और अधिक बढ़ सकती है, ऐसे में ट्रैफिक, सुरक्षा और स्वच्छता को लेकर अतिरिक्त व्यवस्थाएं लागू की गई हैं।

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