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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का बयान: शंकराचार्य की परिभाषा पर सवाल

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने यूपी विधानसभा में दिए गए योगी आदित्यनाथ के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें कहा गया था कि हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं हो सकता। इस पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि ऐसा है, तो यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि शंकराचार्य कैसे होते हैं।

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उन्होंने आगे कहा कि जो लोग शंकराचार्य की अपनी अलग परिभाषा बना रहे हैं, उन्हें इसे स्पष्ट करना चाहिए। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या केवल किसी विशेष व्यक्ति का समर्थन करने वाला ही शंकराचार्य माना जाएगा? उनके अनुसार, केवल सनातन धर्म की बात करना ही शंकराचार्य होने की शर्त नहीं है।

उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में शंकराचार्य वह होता है जो सनातन धर्म के संरक्षण और उत्थान के लिए कार्य करता है। उन्होंने यह भी कहा कि सनातन धर्म का पहला आधार सत्य है। उनके अनुसार, जो व्यक्ति सत्य बोले, गौ माता की रक्षा करे और सनातन धर्म की रक्षा के लिए कार्य करे, वही इस परंपरा के अनुरूप माना जाता है।

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