magbo system

Editor

यूजीसी 2026 कानून के विरोध में केशरिया भारत संगठन का जिला मुख्यालय पर अनिश्चितकालीन धरना

देशभर में चल रहे विरोध की कड़ी में बनारस में तेज़ हुआ आंदोलन, शिक्षा व्यवस्था को “समाज विभाजनकारी” करार

VK Finance

वाराणसी (काशीवार्ता)।
केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए यूजीसी 2026 कानून के विरोध में देशभर में जारी आंदोलन के क्रम में केशरिया भारत संगठन ने वाराणसी में जिला मुख्यालय पर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है। संगठन के कार्यकर्ता कल से ही जिला मुख्यालय परिसर में डटे हुए हैं और सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी कर रहे हैं। धरने को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। मौके पर भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है और शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी रखी जा रही है।
इस धरना-प्रदर्शन का नेतृत्व संगठन के प्रमुख संयोजक कृष्णानंद पांडे कर रहे हैं। उनके साथ प्रदेश अध्यक्ष गौरव सिंह, प्रदेश महासचिव शुभम पांडे, सुमित पांडे, सतीश पांडे एवं अनिल मिश्रा सहित बड़ी संख्या में केशरिया भारत संगठन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद हैं। धरना स्थल पर यूजीसी 2026 कानून को वापस लेने की मांग को लेकर सरकार के खिलाफ लगातार आवाज़ बुलंद की जा रही है।
धरने को संबोधित करते हुए प्रमुख संयोजक कृष्णानंद पांडे ने कहा कि यूजीसी 2026 कानून शिक्षा सुधार के नाम पर समाज को बांटने का कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि जब सरकार ऐसी नीतियां लागू करती है जिनसे बच्चों, बेटियों, बहनों और पूरे परिवार के भविष्य पर संकट खड़ा हो जाए, तो ऐसे कानूनों का विरोध करना समाज की जिम्मेदारी बन जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कानून का संभावित दुरुपयोग समाज की संस्कृति, सामाजिक व्यवस्था और आपसी एकता को कमजोर करने की दिशा में किया जा सकता है।
शंकराचार्य से जुड़े प्रश्न पर अपनी बात रखते हुए कृष्णानंद पांडे ने कहा,
“साधु की जाति मत पूछो, ज्ञान पूछो। शंकराचार्य धर्मगुरु होते हैं और मैं इस विषय को अलग दृष्टिकोण से देखता हूं। लेकिन यूजीसी एक्ट का मामला बिल्कुल अलग है। आज हम यहां इसलिए बैठे हैं क्योंकि यह कानून हमारे समाज, हमारी शिक्षा व्यवस्था और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की नींव पर सीधा प्रहार करता है।”
धरने में मौजूद प्रदेश अध्यक्ष गौरव सिंह ने कहा कि केशरिया भारत संगठन ने बनारस में सबसे पहले समान शिक्षा व्यवस्था को लेकर आवाज़ उठाई थी। उन्होंने बताया कि संगठन द्वारा इस विषय में मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मांग की गई थी कि देश में शिक्षा का स्तर एक समान होना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब एक ही देश में कोई बच्चा आईसीएसई बोर्ड में आधुनिक सुविधाओं के साथ पढ़ रहा है और कोई बच्चा यूपी बोर्ड में बुनियादी संसाधनों के बिना पढ़ने को मजबूर है, तो यह असमानता क्यों। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा में समानता लाने के बजाय समाज को बांटने वाली नीतियां लागू कर रही है।
वहीं प्रदेश महासचिव शुभम पांडे ने कहा कि यूजीसी 2026 कानून के कारण छात्र, शिक्षक और अभिभावक सभी असमंजस और भय की स्थिति में हैं। यह कानून शिक्षा को सरल, सुलभ और समान बनाने के बजाय और अधिक जटिल तथा भेदभावपूर्ण बना रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते इस पर पुनर्विचार नहीं किया गया, तो आने वाले समय में इसके गंभीर सामाजिक परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
धरना-प्रदर्शन को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि स्थिति पूरी तरह शांतिपूर्ण है। पुलिस बल मौके पर तैनात है और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह तैयार है।
केशरिया भारत संगठन ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जब तक यूजीसी 2026 कानून पर पुनर्विचार नहीं किया जाता या इसे वापस लेने की ठोस पहल नहीं होती, तब तक उनका अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन जारी रहेगा।

खबर को शेयर करे

Leave a Comment