वाराणसी। संस्कारों और अध्यात्म की नगरी काशी में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता उभरकर सामने आई है। हालिया आंकड़ों के अनुसार वाराणसी में प्रतिदिन औसतन पांच महिलाएं किसी न किसी रूप में हिंसा का शिकार हो रही हैं, जबकि हर 15 दिन में दुष्कर्म का एक मामला दर्ज किया जा रहा है। ये आंकड़े न केवल भयावह हैं, बल्कि प्रशासन और समाज—दोनों के लिए चेतावनी भी माने जा रहे हैं।

पुलिस रिकॉर्ड और सामाजिक संगठनों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा में घरेलू उत्पीड़न, छेड़छाड़, पीछा करना (स्टॉकिंग) और यौन अपराध प्रमुख रूप से शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सामाजिक दबाव, बदनामी के डर और पारिवारिक कारणों से कई पीड़ित महिलाएं शिकायत दर्ज ही नहीं करातीं, जिससे वास्तविक स्थिति आंकड़ों से कहीं अधिक गंभीर हो सकती है।
महिला अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि कानून और सरकारी योजनाएं मौजूद होने के बावजूद उनका प्रभाव जमीनी स्तर पर सीमित दिखाई देता है। तेज न्यायिक प्रक्रिया की कमी, महिला हेल्पलाइन की निष्क्रियता और संवेदनशील पुलिसिंग का अभाव भी समस्या को और गंभीर बना रहा है।
वहीं प्रशासन की ओर से महिला सुरक्षा को लेकर लगातार प्रयास किए जाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन सामने आए आंकड़े इन दावों पर सवाल खड़े करते हैं। विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि जब तक समाज, प्रशासन और कानून मिलकर ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाएंगे, तब तक काशी में महिला सुरक्षा केवल कागज़ों तक ही सीमित रह जाएगी।
