वाराणसी। नए साल के जश्न ने वाराणसी के हजारों युवाओं को कर्ज के बोझ तले ला खड़ा किया है। जिले में 3253 युवाओं ने न्यू ईयर सेलिब्रेशन के लिए करीब छह करोड़ रुपये का लोन ले लिया, जिसका भुगतान अब उन्हें आने वाले महीनों तक ईएमआई के रूप में करना होगा।

राष्ट्रीयकृत और निजी बैंकों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, 25 दिसंबर से 1 जनवरी 2026 के बीच क्रेडिट कार्ड, नो-कॉस्ट ईएमआई और बाय नाउ पे लेटर (BNPL) जैसी सुविधाओं के जरिए लगभग छह करोड़ रुपये खर्च किए गए। इस रकम का बड़ा हिस्सा होटल नाइट पार्टियों, क्लब एंट्री पास, नाइट आउट, ऑनलाइन केक ऑर्डर और शॉपिंग पर खर्च हुआ।
बताया जा रहा है कि युवाओं ने ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म और ऑफलाइन स्टोर्स पर बिना भविष्य की जिम्मेदारियों पर विचार किए खर्च कर दिया। किसी ने छह महीने तो किसी ने एक साल की अवधि के लिए कर्ज लिया है। नतीजतन, नए साल का जश्न कई युवाओं के लिए ईएमआई की शुरुआत बन गया।
एसबीआई के मैनेजर वेद प्रकाश शर्मा का कहना है कि भावनाओं में आकर किया गया खर्च बाद में आर्थिक दबाव बन जाता है। समय पर ईएमआई न चुकाने पर ब्याज और अतिरिक्त शुल्क जुड़ जाते हैं, जिससे वित्तीय तनाव और बढ़ सकता है। उन्होंने युवाओं को जश्न और जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाए रखने की सलाह दी।
इधर, मंडलीय अस्पताल की मनोरोग चिकित्सक डॉ. उपासना बताती हैं कि जश्न खत्म होते ही जैसे ही ईएमआई के मैसेज और मासिक किस्तों का हिसाब सामने आता है, युवाओं में तनाव बढ़ने लगता है। लगातार यह चिंता बनी रहती है कि खर्च कैसे मैनेज होगा। कई मामलों में नींद न आना, काम में एकाग्रता की कमी, चिड़चिड़ापन और मूड स्विंग जैसी समस्याएं भी सामने आ रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक बना रहने वाला फाइनेंशियल स्ट्रेस मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकता है। ऐसे में जरूरी है कि युवा वर्ग खर्च करने से पहले अपनी आर्थिक स्थिति का आकलन करे और तात्कालिक जश्न के बजाय दीर्घकालिक स्थिरता को प्राथमिकता दे।
