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Sanjay Singhy

पहले था डफरिन ब्रिज, 1948 से नाम हुआ मालवीय पुल

नए पुल पर अब तक काम शुरू नहीं, यातायात को लेकर प्रशासन के माथे पर पड़ा बल

VK Finance

वाराणसी(काशीवार्ता)। निर्माण के वक्त मालवीय पुल का नाम डफरिन ब्रिज था। भारत की आज़ादी के बाद इसका पुनः नामकरण हुआ और पंडित मदन मोहन मालवीय के नाम पर इसका नाम मालवीय पुल पड़ा। इसकी मजबूती का अंदाजा इसकी उम्र से बखूबी लगाया जा सकता है। हालांकि, इसके बाद हिंदुस्तान में बने अनगिनत ऐसे पुल हैं जो या धराशायी हो चुके हैं या फिर उनपर आवागमन बंद है। देखा जाए तो मालवीय पुल की मरम्मत के कारण आवागमन में भारी असुविधा हो रही है। सामने घाट पुल पर वाहनों का भारी दबाव है। आने वाले दिनों में जाम की समस्या बढ़ सकती है। बावजूद इसके मालवीय पुल के समानांतर एक नए पुल की नींव अब तक नहीं रखी जा सकी है। हालांकि, इसकी रूपरेखा बाजपेयी सरकार के समय ही बनी थी। तत्कालीन सड़क परिवहन मंत्री राजनाथ सिंह ने इसका भूमिपूजन भी किया, लेकिन यह परियोजना शुरू हो इसके पहले सरकार बदल गयी।मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद पुनः एक नए पुल के निर्माण का तानाबाना बुना गया। बताया गया कि मालवीय पुल के समानतार एक नया पुल बनेगा जिसमे ऊपर सिक्स लेन की सड़क और नीचे चार रेलवे लाइन होगी। करीब सोलह सौ करोड़ की इस परियोजना के लिए पास में ही स्थित गांधी प्रतिष्ठान की भूमि भी रेलवे ने अपना बता कर ले ली, जिसको लेकर काफ़ी होहल्ला मचा। लेकिन काम अब तक धरातल पर काम शुरू नहीं हो सका है।

यातायात पर गंभीर असर पड़ रहा

मालवीय पुल की मरम्मत के चलते वाराणसी के यातायात पर गंभीर असर पड़ रहा है।सामने घाट गंगा पुल और डाफी गंगा पुल यातायात के दबाव को संभाल नहीं पा रहे हैं।नागरिकों को रोज जाम से जूझना पड रहा है।बिहार और पड़ोस के मुगलसराय चंदौली जनपद से प्रतिदिन लाखों की संख्या में लोग बनारस आते है।जिनके लिए बनारस आना जाना किसी दुःस्वप्न से कम नहीं है।
सरकार को जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान खोजना होगा।

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