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Sanjay Singhy

बिजली निजीकरण के विरोध में बनारस के बिजलीकर्मियों का संघर्ष 377 वें दिन भी जारी

वाराणसी में बिजली कर्मचारियों, पेंशनरों और नियमित कर्मियों का आंदोलन सोमवार को लगातार 377वें दिन भी जारी रहा। अधीक्षण अभियंता कार्यालय सिगरा पर कर्मचारियों ने बिजली के निजीकरण और एलएमवी-10 उपभोक्ताओं पर स्मार्ट मीटर लगाने के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।
वक्ताओं ने बताया कि वर्ष 2000 में संयुक्त संघर्ष समिति और राज्य सरकार के बीच हुए समझौते को अब तक लागू नहीं किया गया है, जबकि उसी के अनुरूप सुविधाओं को बनाए रखने की मांग लगातार उठती रही है। कर्मचारियों ने स्मार्ट मीटर लगाने का भी कड़ा विरोध किया और इसे उपभोक्ता हितों के विपरीत बताया।

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संघर्ष समिति ने निर्णय लिया है कि नियमित कर्मियों और पेंशनरों की समस्याओं को लेकर प्रबंध निदेशक को संयुक्त मांग पत्र भेजा जाएगा। साथ ही संविदाकर्मियों की मनमानी छंटनी को लेकर एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही प्रबंध निदेशक से मिलकर हस्तक्षेप की मांग करेगा। कर्मचारियों का कहना है कि छंटनी से न केवल हजारों परिवारों की जीविका प्रभावित होगी, बल्कि राजस्व वसूली और अनुरक्षण कार्य पर भी सीधा असर पड़ेगा।

पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मियों के साथ किसान संगठनों और अखिल भारतीय ट्रेड यूनियनों ने भी संयुक्त मोर्चा बनाने पर सहमति दे दी है। इस संबंध में 14 दिसंबर को दिल्ली में महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है, जिसमें व्यापक रणनीति तय की जाएगी और आंदोलन के अगले चरण की घोषणा की जाएगी।

संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि एक वर्ष से अधिक समय से कर्मचारी निजीकरण के खिलाफ सड़क पर हैं, जबकि दूसरी ओर केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 का ड्राफ्ट जारी कर दिया है, जो ऊर्जा क्षेत्र के निजीकरण को और तेज कर देगा। इसी कारण अब किसान, मजदूर और बिजलीकर्मियों का संयुक्त राष्ट्रव्यापी आंदोलन तय माना जा रहा है।

सभा को ई. ए.के. सिंह, आतीन गांगुली, आर.के. वाही, ई. अवधेश मिश्रा, ओ.पी. सिंह सहित कई पदाधिकारियों ने संबोधित किया।

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