
गोवा के अरपोरा क्षेत्र में शनिवार देर रात लगी आग ने 25 लोगों की जिंदगी छीन ली। ‘बर्च बाय रोमियो लेन’ नामक नाइट क्लब में गैस सिलेंडर ब्लास्ट के बाद फैली आग और धुएं ने देखते ही देखते पूरे परिसर को मौत के जाल में बदल दिया। मरने वालों में चार पर्यटक, तीन महिलाएं और बड़ी संख्या में क्लब का स्टाफ शामिल है। मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने हादसे की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।
धुआं बना मौत की असली वजह | 25 में 23 लोगों की जान कैसे गई?
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि 25 में से 23 लोग आग से नहीं, धुएं से मरे।
सूत्रों के मुताबिक हादसा रात करीब 1 बजे हुआ, जब किचन एरिया में गैस लीक होने से सिलेंडर फट गया। धमाके के साथ ही घना धुआं बेसमेंट में भर गया, जहां अधिकांश कर्मचारी मौजूद थे।
भागने के बजाय लोग बेसमेंट में ही फंस गए।
आग फैलने से पहले ही दमघोटू धुएं ने लगभग सभी की सांसें रोक दीं।
जांच अधिकारियों का कहना है कि यदि लोग बाहर की ओर भागते, तो कम से कम 23 जानें बच सकती थीं।
“जब काल छाता है, पहले विवेक मर जाता है” – एक चूक और मौत का मंजर
धमाके के बाद अफरा-तफरी में कई कर्मचारी बेसमेंट की ओर भागे, जो सबसे खतरनाक जगह साबित हुई।
कुछ ही मिनटों में स्मोक लेयर नीचे उतर आई और लोगों के बेहोश होकर गिरने का सिलसिला शुरू हो गया।
ब्रिक और वुड इंटीरियर ने धुएं की तीव्रता को और बढ़ा दिया, जिससे बच निकलना लगभग नामुमकिन हो गया।
सीएम सावंत का बयान: “सुरक्षा मानकों की अनदेखी हुई”
मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा कि क्लब ने फायर सेफ्टी मानकों का पालन नहीं किया था।
उन्होंने चेतावनी दी कि
“क्लब प्रबंधन और लापरवाह अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।”
राज्य में पर्यटकों की भारी आवक के बीच हुई इस त्रासदी ने सुरक्षा तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बीजेपी विधायक माइकल लोबो: “सभी नाइट क्लब का ऑडिट होगा”
स्थानीय विधायक माइकल लोबो ने बताया कि 23 शव एक ही परिसर से बरामद किए गए।
उन्होंने कहा कि कलंगुटे पंचायत सभी नाइट क्लबों को नोटिस जारी करेगी और फायर सेफ्टी परमिशन मांगेगी।
जिन क्लबों के पास जरूरी अनुमतियां नहीं होंगी, उनके लाइसेंस रद्द किए जाएंगे।
जांच का दायरा विस्तृत, क्लब सील
पुलिस, एफएसएल और प्रशासन ने क्लब को सील कर दिया है।
गैस कनेक्शन, एग्ज़िट प्लान, वेंटिलेशन, और ओवरक्राउडिंग की भी जांच होगी।
मृतकों के शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए गए हैं, जबकि घायलों की स्थिति पर शाम तक रिपोर्ट जारी होने की संभावना है।
दर्द, धुआं और 25 बुझी जिंदगी—एक चेतावनी, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता
गोवा की यह त्रासदी सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सुरक्षा में लापरवाही का भयावह उदाहरण है।
सवाल यह है—कितनी जिंदगियां और जाएंगी, तब जाकर फायर सेफ्टी को गंभीरता से लिया जाएगा?
