
काशी तमिल संगमम 4.0 इस बार “तमिल कारकुलम: आओ तमिल सीखें” थीम के साथ चल रहा है। कार्यक्रम का उद्देश्य उत्तर और दक्षिण भारत की भाषाई और सांस्कृतिक एकता को मजबूत करना है। इसी पहल के तहत वाराणसी के कई स्कूलों में बच्चों को तमिल भाषा की बुनियादी शिक्षा दी जा रही है।

प्रशिक्षण के चौथे दिन उत्साह साफ नजर आया। बच्चे अब तमिल के सामान्य शब्द, वाक्य और दैनिक बातचीत से जुड़े संवाद आसानी से बोलने लगे हैं। प्रशिक्षकों का कहना है कि शुरुआत में कई छात्रों को उच्चारण में कठिनाई हुई, लेकिन अभ्यास और रोचक तरीकों से पढ़ाने के कारण बच्चों ने तेजी से सीखना शुरू किया।
कक्षाओं में तमिल अक्षरों की पहचान, संख्याएं, अभिवादन, छोटे संवाद और सरल व्याकरण को शामिल किया गया है। बच्चों को तमिल संस्कृति, खानपान और परंपराओं के बारे में भी बताया जा रहा है, जिससे भाषा सीखने में उनकी रुचि और बढ़ी है।
अभिभावक भी इस पहल की सराहना कर रहे हैं। उनका मानना है कि इससे बच्चों को नई भाषा सीखने के साथ-साथ देश की विविधता को समझने का अवसर मिल रहा है। काशी तमिल संगमम की यह पहल वाराणसी में सांस्कृतिक सेतु का एक मजबूत उदाहरण बन रही है।