राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने अचानक राजनीति से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए यह भी कहा कि वह अपने परिवार से दूरी बना रही हैं। रोहिणी ने साफ लिखा कि वह राजनीति छोड़ रही हैं और अपने परिवार से नाता तोड़ रही हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह वही बात है जो संजय यादव और रमीज़ ने उनसे कहने को कहा था। उनके इस संदेश ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी।

उन्होंने पार्टी के हाल के चुनावी नतीजों की ओर संकेत करते हुए कहा कि वह हार की पूरी जिम्मेदारी खुद ले रही हैं। लंबे समय से रोहिणी अपने भाई तेजस्वी यादव के करीबी और राज्यसभा सांसद संजय यादव की भूमिका से नाराज बताई जा रही थीं। पार्टी में बढ़ती दखलंदाजी और निर्णयों में अनदेखी को लेकर उनके मन में असंतोष था। सितंबर में भी उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट साझा कर संजय यादव पर परोक्ष टिप्पणी की थी। उस पोस्ट में कहा गया था कि नेतृत्व की फ्रंट सीट हमेशा शीर्ष नेता के लिए होती है और उनकी अनुपस्थिति में भी किसी को वहां नहीं बैठना चाहिए। रोहिणी ने उस पोस्ट को साझा करते हुए अपनी असहमति साफ दिखाई थी।
अपने ताजा बयान में उन्होंने लिखा कि उनके लिए आत्म-सम्मान सबसे ऊपर है। उन्होंने एक तस्वीर और वीडियो भी साझा किया जिसमें वह अपने पिता की सेवा करती दिखती हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग बड़े फैसलों के लिए जान हथेली पर रखते हैं, उनके भीतर बेखौफ और बेबाक स्वभाव होता है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने एक बेटी और बहन के रूप में अपना कर्तव्य निभाया है और आगे भी उसका पालन करती रहेंगी। उन्होंने साफ किया कि उन्हें न किसी पद की इच्छा है और न कोई राजनीतिक महत्वाकांक्षा।
रोहिणी के इस कदम ने बिहार की राजनीति में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। परिवार की अंदरूनी खींचतान और नाराजगी आखिर किस हद तक बढ़ चुकी थी, यह उनके संदेश से साफ झलकता है। आने वाले दिनों में इसका असर राजद की आंतरिक राजनीति पर जरूर पड़ेगा।
