वाराणसी। भारतीय रेलवे के इतिहास में बनारस स्टेशन इकलौता स्टेशन है जिसके नाम के बोर्ड चार भाषाओं में लगाये गए है।
आमतौर पर रेलवे स्टेशनों के नाम तीन भाषाओं में लिखे जाते है। हिंदी, अंग्रेजी और संबंधित राज्य की क्षेत्रीय/स्थानीय भाषा। एक अलग भाषा जैसे उर्दू या संस्कृत का उपयोग किया जा सकता है।
रेलवे द्वारा सामान्य नियम यह है कि रेलवे स्टेशनों के नाम हिंदी, अंग्रेजी और एक क्षेत्रीय भाषा में लिखे जाते हैं।
क्षेत्रीय भाषा का निर्धारण स्टेशन का नाम उस राज्य की आधिकारिक या सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाओं के आधार पर होता है।
जैसे तमिलनाडु में स्टेशन के नाम तमिल, हिंदी और अंग्रेजी में लिखे जाते हैं। उत्तराखंड में, हिंदी, अंग्रेजी और संस्कृत में नाम लिखे जाते हैं।
जहां क्षेत्रीय भाषा हिंदी हो तो नाम बोर्ड केवल हिंदी और अंग्रेजी में होंगे।उत्तर प्रदेश और बिहार में, आधिकारिक भाषा उर्दू होने के कारण स्टेशन के नाम उर्दू, हिंदी और अंग्रेजी में लिखे जाते हैं।
जबकि बनारस स्टेशन पर हाल ही में प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान स्टेशन के द्वितीय प्रवेश द्वार की तरफ बोर्ड बदल दिए गए।और बनारस स्टेशन के अंग्रेजी, हिंदी और संस्कृत पहले से अंकित था।उसमें उर्दू को जोड़ दिया गया।जिससे बनारस स्टेशन के नाम का बोर्ड चार भाषाओं में लगने वाला इकलौता स्टेशन बन गया।
