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काशी की अनोखी परंपरा: हिंदू महीने के नाम पर मुस्लिम करते हैं नमाज अदा, नाम पड़ा ‘अगहनी जुमा’

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वाराणसी। परम्पराओं के शहर काशी में कई जीवंत परम्पराएं हैं। ऐसे में हिंदू महीने के अगहन माह के पहले जुमे को मुस्लिम बंधु नमाज अदा करके इस परम्परा को जीवंत करते हैं। शहर के पुराने पुल स्थित मस्जिद में मुस्लिमों इस परम्परा का निर्वहन करते हुए नमाज अदा किया। बताया जा रहा है कि यह परंपरा लगभग 450 वर्ष पुरानी और मुगल बादशाह अकबर के ज़माने से है। इसकी सबसे खास बात यह है कि यह परंपरा केवल बनारस में है।

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परम्परा के मुताबिक, 450 वर्ष पहले जब देश में सूखा ने सभी क्षेत्रों को प्रभावित किया। तब बुनकरों को भी आजीविका की समस्या सताने लगी। इस विपत्ति काल में बुनकरों को एक अनोखी युक्ति सूझी। उन्होंने पुरानेपुल स्थित पुलकोहना ईदगाह महीने में जुमे की नमाज अदा की। इस नमाज के साथ ही चमकीली बूंदें गिरी और समृद्धि की किरणें फैलीं। यह नमाज अब हर वर्ष अगहन माह के दूसरे जुमे को मुल्क की तरक्की और खुशहाली के लिए पढ़ी जाती है। जिसमें हजारों बुनकर शामिल होते हैं। आज के दिन मुर्री (कारोबार) भी बंद रहता है।

नमाज के बाद सूखे से मिली मुक्ति

मस्जिद परिसर में शुकवार को नमाज के बाद तंजीम बाईसी के सरदार मोईनुद्दीन अंसारी ने इस परम्परा के बारे में बताते हुए कहा कि यह लगभग 450 वर्ष पुरानी है। उस वक़्त देश में अकाल पड़ा और कारोबार थप हो गए। लोग दाने-दाने को मोहताज हुए तो उस विपत्ति काल में मुस्लिमों ने अगहनी जुमे की नमाज अदा की। बताया कि इस नमाज के बाद विपत्तिकाल समाप्त हुआ और बारिश हुई। तभी से यह परंपरा अनवरत जारी है।

इस दिन कारोबार रहता है बंद

बताया कि आज के दिन सभी मुस्लिम कारोबार बंद रखते हैं। नमाज के बाद सभी तंजीमों के सरदार और सदस्य मिलकर बनारस के कारोबार से जुड़े लोगों के साथ बैठकर कारोबार में हो रही समस्याओं के बारे में चर्चा करते हैं और इसका कैसे समाधान निकाला जाय, इस पर चर्चा करते हैं। सभी सरदार अपनी-अपनी तंजीम का प्रतिनिधित्व करते हैं और अपनी समस्याओं को रखते हैं।

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