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सद्गुरु कबीर प्राकट्य महोत्सव: भजन-सत्संग और श्रद्धा से गूंजा लहरतारा धाम

वाराणसी।सद्गुरु कबीर प्राकट्य महोत्सव के दूसरे दिन का शुभारंभ आश्रम के संत अनुपम दास साहेब के भावपूर्ण भजनों से हुआ। “काशी नगरिया रहले लहरतलैया कमल फूल पर भइले प्रकाश हो” भजन से उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। इसके बाद महंत अगम मुनि साहेब और महंत घनश्याम दास जी साहेब ने अपने मधुर भजनों और प्रवचनों के माध्यम से सद्गुरु कबीर साहेब के आदर्शों और प्राकट्य रहस्य को उजागर किया।
भक्तिमति गीता बहन (सूरत, गुजरात) ने भजन “साहेब तेरा भेद जाने कोई” प्रस्तुत करते हुए आंतरिक शुद्धता और गुरु की शरण की आवश्यकता पर बल दिया। धर्माधिकारी सुधाकर दास शास्त्री ने लहरतारा स्मारक की स्थापना में पंथ श्री हुजूर उदितनाम साहेब के योगदान को स्मरण किया। उन्होंने सद्गुरु की करुणा और उनके दर्शन के महत्व पर प्रकाश डाला।
पंथ श्री हजूर अर्धनाम साहेब ने “मोको कहाँ ढूंढे बंदे…” पद के माध्यम से ईश्वर की सर्वव्यापकता का विवेचन करते हुए कहा कि ईश्वर कहीं बाहर नहीं, बल्कि हमारे विश्वास में, हमारे भीतर हैं। उन्होंने समझाया कि भक्ति, त्याग, सेवा और सुमिरन से ही गुरु से जुड़ाव संभव है।
धर्मदास साहेब और कबीर साहेब के ऐतिहासिक संवाद के माध्यम से गुरु के अनुभव और सुरति-साधन की शक्ति को रेखांकित किया गया। संध्या सत्संग में प्रसिद्ध निर्गुण गायक मदन राय ने कबीर वाणियों से समां बाँधा।
भोजन-भंडारे की व्यवस्था सुरेश जी, सपना देवी और उनके परिवार ने की। राजस्थान, गुजरात, बिहार, म.प्र., उत्तर प्रदेश सहित देशभर से संत-महंत व श्रद्धालु जुटे। सेवा समिति के कालूराम , हनुमत जी सहित सभी सदस्य आयोजन में सक्रिय रहे।

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महोत्सव 10 जून को सुबह 8 से 10 बजे तक भव्य शोभा यात्रा और रात्रि में सात्विक आनंद चौका आरती के साथ संपन्न होगा। पूरा परिसर कबीरमय वातावरण में भक्तिरस से सराबोर है।

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